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बृहत्संहिता • अध्याय 97 • श्लोक 11
छत्रचितियूपहुतवहबीजानां सप्तभिर्भवति पक्षैः । छत्रस्य तोरणस्य च केचिन्मासात् फलं प्राहुः ॥
छत्र, यज्ञ को चिति, याज्ञिक यूप, अग्नि, बोज-इन सबों में विकार उत्पन्न होने का फल सात पक्ष में होता है। कोई-कोई आचार्य छत्र और तोरण का फल एक मास में कहते हैं।
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