अहुताशप्रज्वलनं घृततैलवसादिवर्षणं चापि । सद्यः परिपच्यन्ते मासेऽध्यर्धे च जनवादः ॥
अग्नि के बिना ज्वाला उठने का और घी, तेल, चीं आदि (मांस, रक्त, अन, मद्य, पुष्प, फल, पत्ता, मिट्टी और पत्थर) की वर्षा होने का फल तत्काल होता है तथा जनापवाद का फल डेढ़ मास में होता है।
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