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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 9
पुंराशिलग्ने विषमे तिथौ च दिक्स्थः प्रदीप्तः शकुनो नराख्यः । वाच्यं तदा संग्रहणं नराणां मिश्रे भवेत् पण्डकसम्प्रयोगः ॥
पुरुषराशि (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुम्भ) के लग्न में, विषम (१, ३, ५, ७, ११, १३, १५) तिथियों में और पूर्व आदि ( पूर्व, दक्षिण, पश्चिम और उत्तर) दिशाओं में पुरुषसंज्ञक दीप्त शकुन हो तो पुरुषों के साथ समागम होता है। मिश्रित ( पुरुषसंज्ञक लग्न में सम तिथि हो या सम राशि के लग्न में विषम तिथि हो तथा विदिशा या दिशा में स्थित पुरुषसंज्ञक दीप्त शकुन) हो तो नपुंसक के साथ समागम होता है।
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