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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 8
लग्नेऽ थवेन्दो भृगुभांशसंस्थे विदिक्स्थितोऽ घोवदनश्च रौति । दीप्तः स चेत्संग्रहणं करोति योन्या तया या विदिशि प्रदिष्टा ॥
कर्क लग्न में, शुक्र के नवांश में, विदिशा में स्थित होकर दोप्त शकुन नीचे को ओर मुख करके शब्द करे तो उस विदिशा में उक्त स्त्री ('स्त्रीणां विकल्पे बृहती कुमारी' इत्यादि से उक्त स्त्री) के साथ समागम होता है।
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