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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 5
आप्योदय क्षक्षणदिग्जलेषु पक्षावसानेषु च ये प्रदीप्ताः । सर्वेऽपि ते वृष्टिकरा रुवन्तः शान्तोऽपि वृष्टिं कुरुतेऽम्युचारी ॥
जलचर (कर्क, मकर और मौन) लग्न, जलसंज्ञक नक्षत्र (पूर्वाषाढ़ा और शत- भिषा), जलसंज्ञक मुहूर्त, पश्चिम दिशा, जलस्थान-इन स्थानों में तथा पक्षावसान ( अमा और पूर्णिमा) में स्थित प्रदीप्त शकुन शब्द करें तो सभी वृष्टि करने वाले होते हैं। शान्त भी जलचारों शकुन जलादि में स्थित हो तो वृष्टि करने वाले होते हैं।
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