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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 48
नामानि चाग्न्यम्बुकुमार विष्णुशक्रेन्द्रपत्नीचतुराननानाम् । तुल्यानि सूर्यात् क्रमशो विचिन्त्य द्वित्र्यादिवर्णैर्पटयेत् स्वबुद्ध्या ॥
शनि के पवर्ग हैं तथा चन्द्र के यकार आदि आठ वर्ण (य, र, ल, व, श, ष, स, ह) और रवि के अकार आदि बारह स्वर (अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं अ:) हैं।
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