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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 42
लग्ने जमोकारमयाम्बुसंस्थे गमस्तसंस्थे विदुरम्बरे बम्। ठं लग्नगेऽन्त्ये हिबुकाश्रिते डं यमस्तगे दं नास स्थिते वै ॥
मिथुन लग्न में अष्टम नांश हो तो मिथुन में अष्टम नर्वाशाधिपति शुक्र के वर्ग का तृतीय अक्षर जकार, चतुर्य राशि (कन्या) में अष्टम नर्वासाधिपति सूर्य के वर्ग का नवम अक्षर ओकार, सप्तम राशि (पत्र) में अष्टम नवांशाधिपति मंगल के वर्ग का तृतीय अक्षर गकार और दशम राशि (मीन) में अष्टम नांशाधिपति शनि के वर्ग का तृतीय अक्षर बकार आता है। मिथुन लग्न में नवम नवांश हो तो मिथुन में नवम नर्वाशाधिपति बुध के वर्ग का द्वितीय अक्षर ठकार, चतुर्थ राशि (कन्या) में नवम नवांशाधिपति बुध के वर्ग का तृतीय अक्षर डकार, सप्तम राशि (धनु) में नवम नवांशाधिपति बृहस्पति के वर्ग का द्वितीय अक्षर थकार और दशम राशि (मीन) में नवम नवांशाधिपति बृहस्पति के वर्ग का तृतीय अक्षर दकार आता है।
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