प्रग्लग्नगे नं जलगे णमाहुरस्तं गते टं नभसि स्थिते तम् । प्राग्लग्नगे खं जलगे यमाहुरस्तं गते छ नभसि स्थिते फम् ॥
मिथुन लग्न में षष्ठ नवांश हो तो मिथुन में षष्ठ नवांशाधिपति बृहस्पति के वर्ग का पञ्श्चम अक्षर नकार, चतुर्थ राशि (कन्या) में षष्ठ नर्वाशाधिपति बुध के वर्ग का पञ्चम अक्षर णकार, सप्तम राशि (धनु) में षष्ठ नवांशाधिपति बुध के वर्ग का प्रथम अक्षर टकार और दमश राशि (मोन) में षष्ठ नवांशाधिपति के वर्ग का प्रथम अक्षर तकार आता है। मिथुन लग्न में सप्तम नवांश हो तो मिधुन में सप्तम नांशाधिपति मंगल के वर्ग का द्वितीय अक्षर खकार, चतुर्थ राशि (कन्या) में सप्तम नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का द्वितीय अक्षर छकार और दशम राशि (मीन) में सप्तम नांशाधिपति शनि के वर्ग का द्वितीय अक्षर फकार आता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।