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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 4
स्थिरप्रदेशोपलमन्दिरेषु सुरालये भूजलसन्निधौ च । *स्थिराणि कार्याणि चराणि यानि चलप्रदेशादिषु चागमाय ॥
स्थिर स्थान, पत्थर, गृह, देवालय, पृथ्वी पर, जल के समीप-इन स्थानों में स्थित शकुन हों तो स्थिर कार्य का शुभाशुभ फल होता है। यदि वे शकुन चल प्रदेश आदि में स्थित हों तो भविष्यत् कार्य के लिये सूचित करते हैं।
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