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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 38
द्विमूर्तिसंज्ञे मिथुने जकारः षष्ठे बकारः प्रथमांशके स्यात् । धनुर्धरेऽस्तोपगते गकारो मीनद्वये चाम्बरगे सकारः ॥
द्विस्वभाव राशि मिथुन लग्न में प्रथम नवांश हो तो मिथुन में प्रथम नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का तृतीय अक्षर जकार, चतुर्थ राशि (कन्या) में प्रथम नांशाधिपति शनि के वर्ग का तृतीय अक्षर बकार, सप्तम राशि (धनु) में प्रथम नवांशाधिपति मंगल के वर्ग का तृतीय अक्षर गकार और दशम राशि (मोन) में प्रथम नवांशाधिपति चन्द्र के वर्ग का सप्तम अक्षर सकार आता है।
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