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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 37
ऊकारमाहुर्वृषभे जले खमस्ते फकारों नृघटे छकारः । अन्त्ये वृषे टं तमुशन्ति सिंहे थे सप्तगे ठं प्रवदन्ति कुम्भे ॥
वृष लग्न में अष्टम नवांश हो तो वृष में अष्टम नवांशाधिपति सूर्य के वर्ग का पष्ठ अक्षर ऊकार, चतुर्थ राशि (सिंह) में अष्टम नवांशाधिपति मंगल के वर्ग का द्वितीय अक्षर खकार, सप्तम राशि (वृश्चिक) में अष्टम नवांशाधिपति शनि के वर्ग का द्वितीय अक्षर फकार और दशम राशि (कुम्भ) में अष्टम नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का द्वितीय अक्षर छकार आता है। वृष लग्न में नवम नवांश हो तो वृष में नवम नवांशाधिपति बुध के वर्ग का प्रथम अक्षर टकार, सप्तम राशि (वृश्चिक) में नवम नवांशाधिपति बृहस्पति के वर्ग का द्वितीय अक्षर बकार और दशम राशि (कुम्भ) में नवम नर्वासाधिपति बुध के वर्ग का द्वितीय अक्षर ठकार आता है।
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