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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 36
लग्ने ढकारोऽथ जले णकारश्चास्ते धकारोऽम्बरगे नकारः । वृषेषकारो हिबुके चकारः कोटे पकारो नृघटे ककारः ॥
वृष लग्न में षष्ठ नवांश हो तो वृष में षष्ठ नवांशाधिपति बुध के वर्ग का चतुर्थ अक्षर ढकार, चतुर्थ राशि (सिंह) में षष्ठ नवांशाधिपति बुध के वर्ग का पश्चम अक्षर णकार, सप्तम राशि (वृश्चिक) में षष्ठ नवांशाधिपति बृहस्पति के वर्ग का चतुर्थ अक्षर धकार और दशम राशि (कुम्भ) में षष्ठ नवांशाधिपति बृहस्पति के वर्ग का पञ्चम बृ० २० द्वि०-३३ अक्षर नकार आता है। पृष लग्न में सप्तम नवांश हो तो वृष में सप्तम नवांशाधिपति चन्द्र के वर्ग का षष्ठ अक्षर षकार, चतुर्थ राशि (सिंह) में सप्तम नांशाधिपति शुक्र के वर्ग का प्रथम अक्षर चकार, सप्तम राशि (वृश्चिक) में सप्तम नवांशाधिपति शनि के वर्ग का प्रथम अक्षर पकार और दशम राति (कुम्भ) में सप्तम नवांशाधिपति मंगल के वर्ग का प्रथम अक्षर ककार आता है।
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