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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 35
वृषे धकारो हिबुके शकारः कीटे झकारो नृघटे भकारः । लग्ने जकारो हिबुके उकार: कीटे डकारो नृघटे मकारः ॥
वृष लग्न में चतुर्थ नवांश हो तो वृष में चतुर्थ नवांशाधिपति मंगल के वर्ग का चतुर्थ अक्षर घकार, चतुर्थ राशि (सिंह) में चतुर्थ नवांशाधिपति चन्द्र के वर्ग का पञ्चम अक्षर शकार, सप्तम राशि (वृश्चिक) में चतुर्थ नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का चतुर्थ अक्षर झकार और दशम राशि (कुम्भ) में पश्चम नवांशाधिपति शनि के वर्ग का चतुर्थ अक्षर भकार आता है। वृष लग्न में पश्चम नवांश हो तो वृष में पञ्चम नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का पञ्चम अक्षर जकार, चतुर्थ राशि (सिंह) में पञ्चम नवांशाधिपत्ति सूर्य के वर्ग का पञ्चम अक्षर उकार, सप्तम राशि (वृश्चिक) में पञ्चम नवांशाधिपति मङ्गल के वर्ग का पञ्चम अक्षर ङकार और दशम राशि (कुम्भ) में पञ्चम नवांशाधिपति शनि के वर्ग का पञ्चम अक्षर मकार आता है।
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