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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 34
लग्ने बकारो हिबुके जकार ईकारमस्तेऽम्बरगे गकारः । वृषे थकारो हिबुके टकारः कीटे डकारो नृघटे दकारः ॥
वृष लग्न में द्वितीय नवांश हो तो वृष में द्वितीय नवांशाधिपति शनि के वर्ग का तृतीय अक्षर वकार, चतुर्थ राशि (सिंह) में द्वितीय नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का तृतीय अक्षर जकार, सप्तम राशि (वृश्चिक) में द्वितीय नवांशाधिपति सूर्य के वर्ग का चतुर्थ अक्षर ईकार और दशम राशि (कुम्भ) में द्वितीय नवांशाधिपति मंगल के वर्ग का तृतीय अक्षर गकार आता है। वृष लग्न में तृतीय नवांश हो तो वृष में तृतीय नवांशा- धिपति गुरु के वर्ग का द्वितीय अक्षर धकार, चतुर्थ राशि (सिंह) में तृतीय नवांशाधिपति बुध के वर्ग का प्रथम अक्षर टकार, सप्तम राशि (वृश्चिक) में तृतीय नवांशाधिपति बुध के वर्ग का प्रथम अक्षर डकार और दशम राशि (कुम्भ) में तृतीय नवांशाधिपति बृहस्पति के वर्ग का तृतीय अक्षर दकार आता है।
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