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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 33
वृषे फकारो हिबुके खकारः कीटे व पुरो नृघटे छकारः । आद्यांशकेभ्यो मतिमान् विदध्यादनुक्रमेण स्थिरसंज्ञकेषु ॥
वृष लग्न में प्रथम नवांश हो तो वृष में प्रथम नवांशाधिपति शनि के वर्ग का द्वितीय अक्षर फकार, चतुर्थ राशि (सिंह) में प्रथम नवांशाधिपति मङ्गल के वर्ग का द्वितीय अक्षर खकार, सप्तम राशि (वृश्चिक) में प्रथम नवांशाधिपति चन्द्र के वर्ग का
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