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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 32
लग्ने नकारो हिबुके तकारस्तुले णकारो मकरे टकारः । इत्येतदुक्तं चरसंज्ञकस्य वक्ष्ये स्थिराख्यस्य चतुष्टयस्य ॥
मेष लग्न में नवम नवांश हो तो मेष में नवम नांशाधिपति गुरु के वर्ग का पञ्चम अक्षर नकार, चतुर्थ राशि (कर्क) में नवम नवांशाधिपति गुरु के वर्ग का प्रथम अक्षर तकार, सप्तम राशि (तुला) में नवम नवांशाधिपति बुध के वर्ग का पञ्चम अक्षर णकार और दशम राशि (मकर) में नवम नवांशाधिपति बुध के वर्ग का प्रथम अक्षर टकार आता है। यह चरसंज्ञक चार राशियों के लिये कहा गया है। अब स्थिरसंज्ञक चार राशियों के लिये कहता हूँ।
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