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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 31
लग्ने अकारो हिबुको मकारस्तुले इकारो मकरे लकारः । लग्ने ककारो हिबुके पकारस्तुले चकारो मकरे इकार: ॥
मेष लान में सप्तम नवांश हो तो मेष में सप्तम नकाशाधिपति शुक्र के वर्ग का पश्चम अक्षर नकार, चतुर्थ राशि (कर्क) में सप्तम नवांशाधिपति शनि के वर्ग का पश्चम अक्षर मकार, सप्तम राशि (तुला) में सप्तम नवांशाधिपते मंगल के वर्ग का पश्चम अक्षर डकार और दशम राशि (मकार) में सप्तम वासाधिपति चन्द्र के क का तृतीय अक्षर लकार आता है। मेष लग्न में अष्टम नवांश हो तो भेष में अहम नवांशाधिपति मंगल के वर्ग का प्रथम अक्षर ककार, चतुर्थांश (क) में अন্ত্রন नवांशाधिपति शनि के वर्ग का प्रथम अक्षर पकार, सप्तम राशि (तुला) में अह नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का प्रथम अक्षर चकार और दशम राशि (मकर) में अक्षय नवांशाधिपति सूर्य के वर्ग का तृतीय अक्षर इकार आता है।
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