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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 28
मेषेककारो हिबुके यकारस्तुले चकारो मकरे पकारः । मेषे छकारो हिबुकेऽप्यकारस्तुले खकारो मकरे फकारः ॥
जैसे कि लग्न में मेष राशि और प्रथम नवांश हो तो उससे चतुर्थ-चतुर्थ क्रम से मेष, कर्क, तुला और मकर राशियाँ हुई। मेष में प्रथम नवांश का स्वामी मंगल होता है। उसके वर्ग का प्रथम अक्षर ककति आता है। चतुर्थ राशि (कर्क) का प्रथम नवांश स्वामी चन्द्र है, उसके वर्ग का प्रथम अक्षर यकार आता है। सप्तम राशि (तुला) का स्वामी शुक्र है, उसके वर्ग का प्रथम अक्षर चकार आता है और दशम राशि (मकर) का स्वामी शनि है, उसके वर्ग का प्रथम अक्षर पकार आता है। यदि मेष राशि के लग में द्वितीय नवांश हो तो मेष राशि में द्वितीय नवांश-स्वामी शुक्र के वर्ग का द्वितीय अक्षा छकार, चतुर्थ राशि (कर्क) में द्वितीय नवांश-स्वामी सूर्य के वर्ग का प्रथम अक्षर अकार, सप्तम राशि तुला में द्वितीय-नवांश स्वामी मंगल के वर्ग का द्वितीय अक्षर खकार और दशम राशि (मकर) में द्वितीय नवांश-स्वामी शनि के वर्ग का द्वितीय अक्षर फकार आता है।
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