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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 24
शुभग्रहस्तूर्जितवीर्यभागी स्थानांशतुल्याक्षरदः सः चोक्तः । पश्यन् स्थितः केन्द्रत्रिकोणयोर्वा स्वोच्चेऽपि वर्णद्वयमात्मभागे ॥
अत्यन्त वीर्यशाली शुभ ग्रह जिस राशि के जितने संख्यक नवांश पर स्थित हो, तत्तुल्य अक्षरों को देता है। वही अत्यन्त बल अली शुभ ग्रह केन्द्र, त्रिकोण, अपने उच्च या अपने नवांश में स्थित होकर देखा जाता हो तो दो अक्षर देता है।
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