क्रूरोऽक्षरं हन्ति चतुष्टयस्थो दृष्ट्यापि मात्राञ्च त्रिकोणगो वा ॥
लग्न, चतुर्थ, सप्तम और दशम स्थानस्थित नवांशों के द्वारा नामाक्षरों का संग्रह होता है तथा पाप ग्रह केन्द्र या त्रिकोण में स्थित हो तो अथवा पाप ग्रह की दृष्टि से भी अक्षर का नाश होता है।
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