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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 18
वर्गोत्तमे द्वयक्षरकं चरांशे स्थिरक्षभागे चतुरक्षरं तत् । ओजेषु चैभ्यो विषमाक्षराणि स्युद्विस्वभावेषु तु राशिवच्च ॥
चर राशि में प्रथम नवांश, स्थिर राशि में पश्चम नवांश और द्विस्वभाव राशि में नवम नवांश वर्गोत्तम संज्ञक हैं। यदि सम राशियों में चर राशि का वर्गोत्तम नवांश हो तो दो अक्षरों का, स्थिर राशि का वर्गोत्तम नवांश हो तो चार अक्षरों का, विषम राशियों में चर राशि का वर्गोत्तम नवांश हो तो तीन अक्षरों का और स्थिर राशि का वर्गोत्तम नवांश हो तो पाँच अक्षरों का नाम होता है। द्विस्वभाव राशियों में राशि की तरह ही नामाक्षरों को भी संख्या होती है। जैसे-द्विस्वभाव राशियों में विषम राशि (मिधुन या धनु) वर्गोत्तम नवांश हो तो तीन या सात अक्षरों का और सम राशि (कन्या या मीन) का नवांश हो तो चार-छ: अक्षरों का नाम होता है।
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