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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 14
अतः परं लोकनिरूपितानि द्रव्येषु नानाक्षसंग्रहाणि । इष्टप्रणीतानि विभाजितानि नामानि केन्द्रक्रमशः प्रवक्ष्ये ॥
अब प्रश्नज्ञान के बाद द्रव्यों (धातु, मूल और जीवों) में लोकप्रसिद्ध अनेक अक्षरों से संगृहीत, इष्ट (नारायण, अर्क, वसिष्ठ, पराशर, मय आदि) से निर्मित, विभागीकृत नामों को केन्द्र के क्रम से कहते हैं।
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