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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 13
क्रूरः षष्ठे क्रूरदृष्टो विलग्नाद् यस्मिन् राशी तद्गृहाने व्रणोऽस्य । एवं प्रोक्तं यन्मया जन्मकाले चिह्न रूपं तत्तदस्मिन् विचिन्त्यम् ॥
छठे स्थान में स्थित होकर पापग्रह से देखा जाता हो, उस राशि के सम्बन्धी अङ्ग ( 'कालाङ्गानि वराङ्ग' इत्याद्युक्त अंग ) में व्रणयुत पुरुष का समागम होता है। इस प्रकार जन्म में जो मैंने कहा है, उन सबका इस प्रकरण में विचार करना चाहिये।
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