सभी कार्यों के प्रारम्भ में सूर्ययुत राशि से लग्न राशि तक गिने। जिस राशि में रवि बैठा हो वह सम्पत्, द्वितीय राशि विपत्, तृतीय सम्पत् इत्यादि क्रम से लग्नराशि तक गिने। सम्पत् राशि में कार्य की सम्पत्ति और विपत् राशि में कार्य को विपत्ति जाननी चाहिये।
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