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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 11
प्रारम्भमाणेषु च सर्वकार्येष्वर्कान्विताद्धाद्रणयेद्विलग्नम् । सम्पद्विपच्चेति यथा क्रमेण सम्पद्विपच्चेति तथैव वाच्या ॥
सभी कार्यों के प्रारम्भ में सूर्ययुत राशि से लग्न राशि तक गिने। जिस राशि में रवि बैठा हो वह सम्पत्, द्वितीय राशि विपत्, तृतीय सम्पत् इत्यादि क्रम से लग्नराशि तक गिने। सम्पत् राशि में कार्य की सम्पत्ति और विपत् राशि में कार्य को विपत्ति जाननी चाहिये।
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