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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 10
एवं रवेः क्षेत्रनवांशलग्ने लग्ने स्थिते वा स्वयमेव सूर्ये। दीप्तोऽभिधत्ते शकुनो विरौति पुंसः प्रधानस्य हि कारणं तत् ॥
इसी प्रकार जिस समय नवांश और लग्न में रवि की राशि हो या लग्न में स्वयं सूर्य अवस्थित हो एवं उस समय शकुन शब्द करे तो प्रधान पुरुष के आगमन का कारण होता है।
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