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बृहत्संहिता • अध्याय 96 • श्लोक 1
दिग्देशचेष्टास्वरवासरर्क्षमुहूर्तहोराकरणोदयांशान् चरस्थिरोन्मिश्रबलाबलं च बुद्ध्वा फलानि प्रवदेद्रुतज्ञः ॥
दिक् (पूर्व आदि और अङ्गारित आदि), देश, चेष्टा, स्वर ( दीप्त और शान्त), दिन, नक्षत्र, मुहूर्त ( शिवा आदि), होरा (राश्यर्ष और कालहोरा), करण, लग्न, अंश, ( द्रेष्काण, नवांश, द्वादशांश और त्रिंशांश), चर (मेष, कर्क, तुला और मकर), स्थिर ( वृष, सिंह, वृश्चिक और कुम्भ), उन्मिश्न (द्विस्वभाव = मिथुन, कन्या, धनु और मीन) -इन शकुनों का और राशियों का बलाबल जान कर शकुनों के शब्द को जानने वालों को फलकथन करना चाहिये।
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