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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 8
अनिमित्तसंहतैर्शममध्यगैः शुद्भयं प्रविरुवन्द्भिः । वर्गवर्गस्यैः ॥
रोषश्चक्राकारैरभिपातो यदि कौवे विना कारण गाँव के बीच में एकत्र होकर बहुत शब्द करें तो दुर्भिक्ष का भय, चक्र की तरह इकट्ठे होकर स्थित हों तो नगर का रोध और वर्ग-वर्ग करके स्थित हों तो उपद्रव होता है ।
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