द्वित्रिचतुःशावत्वं सुभिक्षदं पश्चभिर्वृपान्यत्वम् । अण्डावकिरणमेकाण्डताप्रसूतिश्च न शिवाय ॥
यदि कौए के दो, तीन चार बच्चे हों तो सुभिक्ष, पाँच बच्चे हों तो दूसरे राजा का अधिकार तया यदि उसका अण्डा हो गिर जाय अथवा एक ही अण्डा दे या दे हो नहीं तो अमंगल होता है।
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