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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 55
कडिति फलाप्तिः फलदाहिदर्शनं टड्डिति प्रहाराः स्युः । स्त्रीलाभः स्त्रीति रुते गडिति गवां पुडिति पुष्याणाम् ॥
काक का 'कड' शब्द अभीष्ट फल प्राप्ति और शुभ देने वाले सर्प का दर्शन कराता है तथा 'टट्ट' शब्द घात, 'स्त्री' शब्द स्त्री-लाभ, 'गड्' शब्द गायों का लाभ और 'पुड्' शब्द फूलों का लाभ कराता है।
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