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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 52
खरेखरे पथिकागममाह कखाखेति यायिनो मृत्युम् । गमनप्रतिषेधिकमा कखला सद्योऽभिवर्षाय वर्षाय ॥
काक का 'खरे खरे' शब्द पथिक के आगमन को कहता है, 'कखाखा' शब्द गमन करने वाले की मृत्यु को सूचित करता है, 'आ' शब्द यात्रा में विघ्न उपस्थित करता है और 'कखला' शब्द सद्यः (उसी दिन वर्षा के लिये होता है।
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