मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 50
का इति काकस्य रुतं स्वनिलयसंस्थस्य निष्फल प्रोक्तम् । कवइति चात्मप्रीत्यै केति रुते स्निग्धमित्राप्तिः ॥
अपने घोसले में अवस्थित काक का 'का' शब्द निष्फल, 'कव' शब्द अपनी प्रसत्रता के लिये, 'क' शब्द प्रिय की प्राप्ति कराने वाला
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें