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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 47
बन्धः सूकरसंस्थे पङ्काक्ते सूकरे द्विकेऽर्थाप्तिः । क्षेमं खरोष्ट्रसंस्थे केचित् प्राहुर्वधं तु खरे ॥
सूअर पर स्थित काक हो तो बन्धन, कीचड़ से लिपटे हुये सूअर पर स्थित काक हो तो धन का लाभ तथा गदहे और ऊँट पर स्थित काक हो तो क्षेम करता है। किसी का मत है कि गदहे पर स्थित काक वध करता है।
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