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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 45
स्कन्धावारादीनां निवेशसमये रुवंचलत्पक्षः । सूचयतेऽन्यस्थानं निश्चलपक्षस्तु भयमात्रम् ॥
यात्रा में गया हुआ राजा जहाँ पर निवास करता है, उसको 'स्कन्धावार' कहते हैं। स्कन्धावार आदि के निर्माण काल में पंखों को चलाता हुआ काक शब्द करे तो दूसरे स्थान में निवास करने को सूचित करता है तथा पंखों को स्थिर करके शब्द करे तो जनभर को मचित करता है: स्थानान्तर गमन को नहीं।
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