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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 43
अन्योऽन्यभक्षसंक्रामितानने तुष्टिरुत्तमा भवति । विज्ञेयः स्त्रीलाभो दम्पत्योर्विरुवतोर्युगपत् ॥
यदि दो कौवे परस्पर एक-दूसरे के मुख में भोजन देते हों तो गमन करने वाले को उत्तम तुष्टि का लाभ होता है तथा नर-मादा दोनों साथ-साथ शब्द करें तो त्री का लाभ होता है।
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