यदि शृङ्खलां वरत्रां वल्लीं वाऽऽदाय वाशते बन्धः । पाषाणस्थे च भयं क्लिष्टापूर्वाच्विकयुतिश्च ॥
यदि कौआ लोहे की जञ्जीर, बरत्रा (चमड़े की रस्सी) और लता को मुख में लेकर शब्द करे तो बन्धन होता है तथा पत्थर पर बैठा हुआ काक मार्ग में अपरिचित मनुष्य का समागम करता है।
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