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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 39
मृतपुरुषाङ्गावयवस्थितोऽभिविरुवन् करोति मृत्युभयम् । मञ्जन्नस्थि च चश्वा यदि विरुवत्यस्थिभङ्गाय ॥
मृत पुरुष के अंगों पर स्थित होकर बोलता हुआ काक गमन करने वाले के सामने पड़े तो मृत्यु का भय होता है तथा चोंच से हड्डी को तोड़ता हुआ काक शब्द करे तो गमन करने वाले की हड्डी टूटने का कारण होता है ।
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