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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 38
छिन्नाषेऽङ्गच्छेदः कलहः शुष्कद्रुमस्थिते ध्वांक्षे । पुरतश्च पृष्ठतो वा गोमयसंस्थे धनप्राप्तिः ॥
यदि काक ऊपर से कटे हुये वृक्ष पर बैठा हो तो अङ्गच्छेद, सूखे पृक्ष पर बैठा हो तो कलह और आगे या पीछे गोबर पर बैठा हो तो धन का लाभ करता है।
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