मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 34
निष्पन्नसस्यशाद्वलभवनप्रासादहर्म्यहरितेषु धन्योच्छ्यमङ्गल्येषु चैव विरुवन् धनागमदः ॥
पके हुये धान्य वाले स्थान, दूबयुक्त गृह, देवगृह, हर्म्य, हरा स्थान, धन्य (शुभ) स्थान, ऊँचे स्थान और प्रशस्त स्थान में स्थित काक शब्द करे तो धन की प्राप्ति होतो है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें