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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 33
सुस्निग्धपत्रपल्लवकुसुमफलानप्रसुरभिमधुरेषु । सक्षीराव्रणसंस्थितमनोज्ञवृक्षेषु चार्थसिद्धिकरः ॥
स्निग्ध पत्ते, नवीन पल्लव, फूल और फलों से नम्र, सुगन्धियुत, मधुर, छिद्ररहित और मनोहर वृक्ष पर स्थित काक अर्थ-सिद्धि करने वाला होता है।
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