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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 32
सस्योपेते क्षेत्रे विरुर्वज शान्ते ससस्यभूलब्धिः । आकुलचेष्टो विरुवन् सीमान्ते क्लेशकृद्यातुः ॥
यदि धान्यसहित खेत की शान्ता दिशा में स्थित होकर काक शब्द करे तो धान्य- सहित भूमि का लाभ होता है तथा गाँव की सीमा के अन्त में स्थित होकर व्याकुलतापूर्वक शब्द करे तो गमन करने वाले को क्लेश करने वाला होता है।
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