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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 31
दृष्ट्वार्कमेकपादस्तुण्डेन लिखेद्यदा स्वपिच्छानि । पुरतो जनस्य महतो वधमभिधत्ते तदा बलिभुक् ॥
यदि कौवा एक पाँव से खड़ा होकर सूर्य को देखते-देखते अपनी चोंच से पंखों को कुरेदे तो भविष्य में किसी प्रधान पुरुष के वध को सूचित करता है।।३१।। अर्कमादित्यं दृष्ट्ा अवलोक्य एकपाद एकेनैव पादेन स्थितस्तुण्डेन चक्ष्वा स्वपिच्छा- न्यात्मीयान्यङ्गरुहाणि यदा बलिभुक् काकी लिखेत्, तदा पुरतो महतः प्रधानस्य जनस्य बर्थ मृत्युमभिधत्ते ददाति ।
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