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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 30
प्रतिवाश्य पृष्ठतो दक्षिणेन यायाद् द्रुतं क्षतजकारी। एकचरणोऽर्कमीक्षन् विरुवंश्च पुरो रुधिरहेतुः ॥
यदि कौआ पीठ की तरफ शब्द करके दक्षिण पार्क से होकर चला जाय तो गमन करने वाले के शरीर से किसी कारणवश खून निकलता है। यदि एक पाँव से खड़ा होकर सूर्य को देखता हुआ शब्द करे तो आगे खून निकलने का कारण होता है।
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