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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 29
दक्षिणविरुतं कृत्वा वामे विरुयाद्यथेप्सितावाप्तिः । प्रतिवाश्य पुरो यायाद् द्रुतमत्यर्थागमो भवति ॥
यदि कौआ गमन करने वाले के दक्षिण भाग में शब्द करके वाम भाग में शब्द करे तो अभिलषित अर्थ का लाभ होता है। यदि शब्द करके आगे होकर चला जाय तो गमन करने वाले को अधिक घंटे का लाभ होता है।
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