यदि गमन करने वाले के चाम भाग में स्थित कौआ पीछे की ओर गमनशील
होकर बार-बार शब्द करे तो अर्थ, की सिद्धि होती है। पूर्व देशवासियों के दक्षिण में
स्थित काक का भी इसी प्रकार का फल होता है अर्थात् यात्राकाल में पूर्व देशवासियों
के दक्षिण में स्थित कौआ पौछे की ओर गमनशील होकर शब्द करे तो अर्थ की सिद्धि
होती है।
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