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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 26
वामे वाशित्वादौ दक्षिणपार्श्वेऽनुवाशते यातुः । अर्थापहारकारी तद्विपरीतोऽर्थसिद्धिकरः ॥
यदि कौआ पहले यात्रा करने वाले के वाम भाग में शब्द करके फिर दक्षिण भाग ३० ५० द्वि०-३ में शब्द करे तो धन का अपहरण करने वाला होता है। इससे विपरीत हो (दक्षिण भाग में शब्द करके फिर वाम भाग में शब्द करे) तो अर्थ-सिद्धि करता है।
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