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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 24
ऐशान्यां सम्प्राप्तिर्धृतपूर्णानां भवेदनडुहश्च । एवं फलं गृहपतेगृहपृष्ठसमाश्रिते भवति ॥
यदि कौआ शान्त ईशान कोण की तरफ मुख करके शब्द करे तो घी से युक्त पक्ष्य पदार्थ और बैल का लाभ होता है। इसी प्रकार घर के पीछे स्थित कौए के फल भी गृहस्वामी को होते है।
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