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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 23
मारुत्यां शस्त्रायुधसरोजवल्लीफलाशनाप्तिश्च । सौम्यायां परमात्राशनं तुरङ्गाम्बरप्राप्तिः ॥
यदि कौआ शान्त वायव्य दिशा को देखता हुआ शब्द करे तो शत्र, लोहा, आयुध (खड्ग आदि), कमल, लता, फल और भोजन का लाभ होता है। यदि शान्त उत्तर दिशा की तरफ मुख करके शब्द करे तो पायस भोजन, घोड़ा और बख का लाभ होता है।
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