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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 22
नैऋत्यां दूताश्वोपकरणदधितैलपललभोज्याप्तिः । वारुण्यां मांससुरासवधान्यसमुद्ररत्नाप्तिः ॥
यदि कौवा शान्त नैऋत्य कोण को देखता हुआ शब्द करे तो दूत, घोड़े का उपकरण, दही, तेल, मांस और भोज्य पदार्थ का लाभ होता है। यदि शान्त पश्चिम दिशा की तरफ देखता हुआ शब्द करे तो मांस, मद्य, आसव, धान्य और समुद्रोत्पन्न रत्नों का लाभ होता है।
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