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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 21
आग्नेय्यामनलाजीविकयुवतिप्रवर धातुलाभश्च । याम्ये माषकुलूत्याभोंज्यं गान्धर्विकैयॉगः ॥
यदि कौआ शान्त आग्नेय कोण को देखता हुआ शब्द करे तो अग्नि से जोविका करने वाले (सोनार, लोहार आदि) और युवती त्री का समागम तथा उत्तम धातु (सुवर्ण आदि) का लाभ होता है। यदि कौआ शान्त दक्षिण दिशा को देखता हुआ शब्द करे तो उड़द और कुलची का भोजन तथा गान विद्या जानने वाले के साथ समागम होता है।
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