शान्तामाहर मि लिक शान्तामैन्द्रीमवलोकयन् रुयाद्राजपुरुषमित्राप्तिः। भवति च सुवर्णलब्धिः शाल्यन्त्रगुडाशनाप्तिश्च ॥
यदि कौआ शान्त पूर्व दिशा को देखता हुआ शब्द करे तो राजपुरुष और मित्र का समागम, सुवर्ण का लाभ तथा शालिधान्य और गुड़मिश्रित भोजन का लाभ होता है।
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